उपराष्ट्रपति ने राजीव गांधी सेंटर फॉर कंटेम्पररी स्टडीज, मुम्बई के पहले स्थापना दिवस लेक्चर में संबोधित किया
2050 में भारत विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होगा
भारत के उपराष्ट्रपति श्री मोहम्मद हामिद अंसारी ने राजीव गांधी सेंटर फॉर कंटेम्पररी स्टडीज (समकालीन अध्ययन के लिए राजीव गांधी केन्द्र) मुम्बई के प्रथम स्थापना दिवस लेक्चर में संबोधित करते हुए कहा कि मुम्बई विश्वविद्यालय में फिर से आकर उन्हें बहुत खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी एक द्रष्टा थे जिन्होंने हमारी इस महान धरती के भविष्य पर ध्यान केन्द्रित किया। राजीव गांधी एक यथार्थवादी थे जिन्होंने भविष्य की दृष्टि को वर्तमान में ही आश्रय देकर और उसपर आगे काम करने को प्रोत्साहन दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2050 में भारत विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होगा। इसकी 1.5 बिलियन की जनंसख्या चीन की जनसंख्या से लगभग 50 मिलियन अधिक हो जाएगी। गोल्डमैन सैचस ने दिसंबर 2005 में बीआरआईसी अर्थव्यवस्थाओं पर अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि 2050 तक भारत चीन और अमेरिका के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। हमारा सकल घरेलू उत्पाद चीन के सकल घरेलू उत्पाद के आधे से थोड़ा उपर और अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक तिहाई होगा। विश्वबैंक और अन्य मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा भी कुछ ऐसे ही अनुमान लगाये गए हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक सफलता और समृध्दि तीन बातों पर निर्भर करेगी - हमारे लोगों का मानवीय विकास, निवेश एवं प्रौद्योगिकी को आकर्षित करने की हमारे विशाल बाजार की सफलता और अच्छी गवर्नेंस। शिक्षा लोगों के सशक्तिकरण का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2050 का भारत ज्यादा समृध्द, ज्यादा समेकित, ज्यादा अनुग्रही होगा और उसके पास जटिल सामाजिक मुद्दों को हल करने की अपनी क्षमता पर अधिक विश्वास होगा।
सोमवार, 31 मार्च 2008
सोमवार, 17 मार्च 2008
चीन में बर्फबारी से बेहाल लोग
चीन में बर्फबारी से बेहाल लोग
बर्फ ने रोक दिए सभी रास्ते
खराब मौसम और अभूतपूर्व बर्फबारी से जूझ रहे चीन में अधिकारियों ने करीब ढाई लाख सैनिकों को राहत के काम में लगाया है। दक्षिणी और पूर्वी चीन में ठप हो गयी रेल और हवाई सेवाएं धीरे धीरे सामान्य तो हो रही हैं। लेकिन अधिकारियों को आशंका है कि स्टेशनों पर फंसे लाखों लोगों को अपने अपने घरों तक पहुंचने में अब भी कई दिन लग सकते हैं। पचास साल में पहली बार हो रही इतनी भीषण बर्फबारी ने लगभग सब कुछ जमा दिया है । सड़कें बर्फ से दब गयी है और कई वाहन जहां के तहां फंस गए हैं। उन्हें निकालने की कोशिशें जारी हैं। चीन का कहना है कि बर्फबारी से उसे कई अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
चीन में 50 वर्षों में सबसे भयानक बर्फीले तूफानों से निपटने के लिये लगभग ढाई लाख सैनिकों की मदद ली जा रही है। शिनहुआ समाचार एजैंसी के मुताबिक देश की 160 काउंटियों और मध्य चाइना के कई शहरों में बिजली और पानी की किल्लत है। अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 60 लोगों की मृत्यु हो गई है और लगभग 18 लाख लोगों को स्थानांतरित किया जा रहा है। 25 लाख घर नष्ट हो गये हैं। भारी बर्फबारी के कारण रेल, रोड और विमान सेवाएं प्रभावित हुई है। अब तक कुल साढ़े सात अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।
बर्फ ने रोक दिए सभी रास्ते
खराब मौसम और अभूतपूर्व बर्फबारी से जूझ रहे चीन में अधिकारियों ने करीब ढाई लाख सैनिकों को राहत के काम में लगाया है। दक्षिणी और पूर्वी चीन में ठप हो गयी रेल और हवाई सेवाएं धीरे धीरे सामान्य तो हो रही हैं। लेकिन अधिकारियों को आशंका है कि स्टेशनों पर फंसे लाखों लोगों को अपने अपने घरों तक पहुंचने में अब भी कई दिन लग सकते हैं। पचास साल में पहली बार हो रही इतनी भीषण बर्फबारी ने लगभग सब कुछ जमा दिया है । सड़कें बर्फ से दब गयी है और कई वाहन जहां के तहां फंस गए हैं। उन्हें निकालने की कोशिशें जारी हैं। चीन का कहना है कि बर्फबारी से उसे कई अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
चीन में 50 वर्षों में सबसे भयानक बर्फीले तूफानों से निपटने के लिये लगभग ढाई लाख सैनिकों की मदद ली जा रही है। शिनहुआ समाचार एजैंसी के मुताबिक देश की 160 काउंटियों और मध्य चाइना के कई शहरों में बिजली और पानी की किल्लत है। अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 60 लोगों की मृत्यु हो गई है और लगभग 18 लाख लोगों को स्थानांतरित किया जा रहा है। 25 लाख घर नष्ट हो गये हैं। भारी बर्फबारी के कारण रेल, रोड और विमान सेवाएं प्रभावित हुई है। अब तक कुल साढ़े सात अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।
शुक्रवार, 14 मार्च 2008
पाकिस्तानी अदालत ने ज़रदारी को भ्रष्टाचार के एक और आरोप से बरी किया
पाकिस्तानी अदालत ने ज़रदारी को भ्रष्टाचार के एक और आरोप से बरी किया
वकीलों ने कहा है कि एक पाकिस्तानी अदालत ने पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक और मामले को खारिज कर दिया है । पिछले हफ्ते ही उन्हें भ्रष्टाचार के कुछ अन्य आरोपों से बरी किया गया था ।
अदालत के इस फैसले से श्री आसिफ अली ज़रदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का केवल एक मामला बचा है ।
पिछले हफ्ते एक अदालत ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ द्वारा दी गई माफी के तहत श्री ज़रदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के पांच आरोप खारिज कर दिये थे । उस समझौते के तहत श्री ज़रदारी और उनकी स्वर्गीय पत्नी, पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो को निर्वासन से पाकिस्तान लौटने की इजाजत दी गई थी ।
अदालत ने श्री ज़रदारी की उन संपत्तियों को भी लौटाने का आदेश दिया, जिन्हें पहले सील कर दिया गया था ।
उनके खिलाफ 1996 में श्रीमती भुट्टो के भाई मुर्तज़ा भुट्टो की हत्या में शामिल होने का आरोप भी है । यह मामला वर्षों से लटका हुआ है ।
श्री ज़रदारी की पार्टी पिछले महीने हुए चुनावों में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के सहयोगियों को हराने के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने पर सहमत हो गई ।
श्री ज़रदारी ने भ्रष्टाचार के आरोपों में बिना अभियुक्त करार दिये, वर्षों पाकिस्तान की जेल में बिताए थे । उन्हें 2004 में जमानत पर रिहा किया गया था और उनका दावा है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित थे ।
वह 1990 के दशक में अपनी पत्नी के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर उनकी सरकार में मंत्री थे और तब उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेने के लिए "मि. 10 परसेंट" कहा जाने लगा था ।
वकीलों ने कहा है कि एक पाकिस्तानी अदालत ने पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक और मामले को खारिज कर दिया है । पिछले हफ्ते ही उन्हें भ्रष्टाचार के कुछ अन्य आरोपों से बरी किया गया था ।
अदालत के इस फैसले से श्री आसिफ अली ज़रदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का केवल एक मामला बचा है ।
पिछले हफ्ते एक अदालत ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ द्वारा दी गई माफी के तहत श्री ज़रदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के पांच आरोप खारिज कर दिये थे । उस समझौते के तहत श्री ज़रदारी और उनकी स्वर्गीय पत्नी, पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो को निर्वासन से पाकिस्तान लौटने की इजाजत दी गई थी ।
अदालत ने श्री ज़रदारी की उन संपत्तियों को भी लौटाने का आदेश दिया, जिन्हें पहले सील कर दिया गया था ।
उनके खिलाफ 1996 में श्रीमती भुट्टो के भाई मुर्तज़ा भुट्टो की हत्या में शामिल होने का आरोप भी है । यह मामला वर्षों से लटका हुआ है ।
श्री ज़रदारी की पार्टी पिछले महीने हुए चुनावों में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के सहयोगियों को हराने के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने पर सहमत हो गई ।
श्री ज़रदारी ने भ्रष्टाचार के आरोपों में बिना अभियुक्त करार दिये, वर्षों पाकिस्तान की जेल में बिताए थे । उन्हें 2004 में जमानत पर रिहा किया गया था और उनका दावा है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित थे ।
वह 1990 के दशक में अपनी पत्नी के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर उनकी सरकार में मंत्री थे और तब उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेने के लिए "मि. 10 परसेंट" कहा जाने लगा था ।
न्यू यार्क स्टेट के गवर्नर अलीअट स्पित्जेर का वेश्यावृत्ति गिरोह से जुड़े होने के बाद त्यागपत्र
न्यू यार्क स्टेट के गवर्नर अलीअट स्पित्जेर का वेश्यावृत्ति गिरोह से जुड़े होने के बाद त्यागपत्र
न्यू यार्क स्टेट के गवर्नर अलीअट स्पित्जेर ने इन आरोपों के सामने आने के बाद अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है कि उनके कथित रूप से एक वेश्यावृत्ति गिरोह से सम्बन्ध थे. डेमोक्रेट गवर्नर स्पित्जेर ने ये घोषणा न्यू यार्क सिटी में अपने कार्यालय में कि. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत अफ़सोस है कि वो अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके और कि वो नहीं चाहते कि जनता का काम उनकी निजी भावनाओं के कारण बाधित हो. स्पित्जेर का त्यागपत्र आगामी सोमवार से लागू होगा. उनका स्थान ले रहे हैं लेफ्टिनेंट गवर्नर david पटेर्सन जो न्यू यार्क स्टेट के पहले अश्वेत गवर्नर होंगे.
न्यू यार्क स्टेट के गवर्नर अलीअट स्पित्जेर ने इन आरोपों के सामने आने के बाद अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है कि उनके कथित रूप से एक वेश्यावृत्ति गिरोह से सम्बन्ध थे. डेमोक्रेट गवर्नर स्पित्जेर ने ये घोषणा न्यू यार्क सिटी में अपने कार्यालय में कि. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत अफ़सोस है कि वो अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके और कि वो नहीं चाहते कि जनता का काम उनकी निजी भावनाओं के कारण बाधित हो. स्पित्जेर का त्यागपत्र आगामी सोमवार से लागू होगा. उनका स्थान ले रहे हैं लेफ्टिनेंट गवर्नर david पटेर्सन जो न्यू यार्क स्टेट के पहले अश्वेत गवर्नर होंगे.
तिब्बत की ओर मार्च कर रहे तिब्बती प्रदर्शनकारी भारतीय पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से निराश
तिब्बत की ओर मार्च कर रहे तिब्बती प्रदर्शनकारी भारतीय पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से निराश
भारतीय पुलिस ने इस हफ्ते के शुरू में करीब 100 तिब्बती निर्वासितों को गिरफ्तार कर लिया, जो भारत से अपने देश के लिए विरोध मार्च पर निकले थे । यह मार्च तिब्बती कार्यकर्ताओं द्वारा बीजिंग ओलंपिक खेलों से पहले चीनी शासन से तिब्बत को आजाद कराने के अपने संघर्ष पर ध्यान आकर्षित करने के लिए दुनिया भर में चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है ।
तिब्बती कार्यकर्ता तिब्बत के लिए अपनी निर्धारित पदयात्रा के लिए करीब 50 किमी तक चले थे, जब पुलिस ने गुरुवार की सुबह हिमाचल प्रदेश के शहर देहरा में उन्हें गिरफ्तार कर लिया और वैन में ले गई ।
तिब्बती युवा कांग्रेस के अध्यक्ष त्सेवांग रिगज़िन ने कहा कि मार्च शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद इसे रोके जाने से हमें आघात लगा है ।
श्री रिगज़िन ने कहा कि हम बहुत निराश हैं कि भारतीय पुलिस ने आज सुबह 6.40 बजे हमारे कार्यकर्ताओं को रोक दिया । जब पुलिस आई और हमें रोका तो सभी प्रदर्शनकारी सड़कों पर बैठ गए और वे वहां से हिले नहीं । वे सब प्रार्थनाएं कर रहे थे और फिर पुलिस जबरन सारे प्रदर्शनकारियों को बस में भर कर ले गई ।
भारतीय पुलिस ने सोमवार को मार्च शुरू होने के कुछ देर बाद ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी । नई दिल्ली ने लाखों तिब्बती शरणार्थियों को शरण दी हुई है, लेकिन वह उन्हें चीन-विरोधी सार्वजनिक प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं देती ।
मार्च के संयोजकों में से एक, रिगज़िन ने कहा कि यह अहिंसक प्रदर्शन था और इसे आगे बढ़ने की इजाजत दी जानी चाहिए थी ।
उन्होंने कहा कि हमने हमेशा कहा है कि तिब्बत की ओर हमारा मार्च पूरी तरह अहिंसक है । हमने रास्ते में किसी के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं की है । हम तो मुट्ठी भर शांतिपूर्ण भिक्षु और भिक्षुणियां तथा कुछ साधारण लोग हैं । हम तो बस सड़क किनारे मार्च कर रहे थे और कोई अपराध नहीं कर रहे थे, इसलिए मार्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए ।
तिब्बती कार्यकर्ताओं का कहना है कि मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना उनके विरोध की राह में पहली बड़ी बाधा है । उन्होंने छह महीने के भीतर तिब्बत की राजधानी ल्हासा पहुंचने का रास्ता तलाश करने का संकल्प किया है ।
तिब्बती प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मातृभूमि पर चीन ने अवैध कब्जा किया हुआ है और वह उसे छुड़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं । अगस्त में होने वाले बीजिंग ओलंपिक खेलों से पहले तिब्बती निर्वासित संगठन दुनिया भर का ध्यान अपने संघर्ष की ओर खींचने के लिए कई तरह के आंदोलन आयोजित कर रहे हैं, जिनमें से एक तिब्बत तक मार्च करना है ।
चीन का कहना है कि 1951 से उसका तिब्बत पर नियंत्रण है और यह उसकी भूमि का अभिन्न हिस्सा है । तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा और तिब्बती शरणार्थी चीन पर इस क्षेत्र में व्यापक मानवाधिकार हनन का आरोप लगाते हैं ।
भारतीय पुलिस ने इस हफ्ते के शुरू में करीब 100 तिब्बती निर्वासितों को गिरफ्तार कर लिया, जो भारत से अपने देश के लिए विरोध मार्च पर निकले थे । यह मार्च तिब्बती कार्यकर्ताओं द्वारा बीजिंग ओलंपिक खेलों से पहले चीनी शासन से तिब्बत को आजाद कराने के अपने संघर्ष पर ध्यान आकर्षित करने के लिए दुनिया भर में चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है ।
तिब्बती कार्यकर्ता तिब्बत के लिए अपनी निर्धारित पदयात्रा के लिए करीब 50 किमी तक चले थे, जब पुलिस ने गुरुवार की सुबह हिमाचल प्रदेश के शहर देहरा में उन्हें गिरफ्तार कर लिया और वैन में ले गई ।
तिब्बती युवा कांग्रेस के अध्यक्ष त्सेवांग रिगज़िन ने कहा कि मार्च शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद इसे रोके जाने से हमें आघात लगा है ।
श्री रिगज़िन ने कहा कि हम बहुत निराश हैं कि भारतीय पुलिस ने आज सुबह 6.40 बजे हमारे कार्यकर्ताओं को रोक दिया । जब पुलिस आई और हमें रोका तो सभी प्रदर्शनकारी सड़कों पर बैठ गए और वे वहां से हिले नहीं । वे सब प्रार्थनाएं कर रहे थे और फिर पुलिस जबरन सारे प्रदर्शनकारियों को बस में भर कर ले गई ।
भारतीय पुलिस ने सोमवार को मार्च शुरू होने के कुछ देर बाद ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी । नई दिल्ली ने लाखों तिब्बती शरणार्थियों को शरण दी हुई है, लेकिन वह उन्हें चीन-विरोधी सार्वजनिक प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं देती ।
मार्च के संयोजकों में से एक, रिगज़िन ने कहा कि यह अहिंसक प्रदर्शन था और इसे आगे बढ़ने की इजाजत दी जानी चाहिए थी ।
उन्होंने कहा कि हमने हमेशा कहा है कि तिब्बत की ओर हमारा मार्च पूरी तरह अहिंसक है । हमने रास्ते में किसी के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं की है । हम तो मुट्ठी भर शांतिपूर्ण भिक्षु और भिक्षुणियां तथा कुछ साधारण लोग हैं । हम तो बस सड़क किनारे मार्च कर रहे थे और कोई अपराध नहीं कर रहे थे, इसलिए मार्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए ।
तिब्बती कार्यकर्ताओं का कहना है कि मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना उनके विरोध की राह में पहली बड़ी बाधा है । उन्होंने छह महीने के भीतर तिब्बत की राजधानी ल्हासा पहुंचने का रास्ता तलाश करने का संकल्प किया है ।
तिब्बती प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मातृभूमि पर चीन ने अवैध कब्जा किया हुआ है और वह उसे छुड़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं । अगस्त में होने वाले बीजिंग ओलंपिक खेलों से पहले तिब्बती निर्वासित संगठन दुनिया भर का ध्यान अपने संघर्ष की ओर खींचने के लिए कई तरह के आंदोलन आयोजित कर रहे हैं, जिनमें से एक तिब्बत तक मार्च करना है ।
चीन का कहना है कि 1951 से उसका तिब्बत पर नियंत्रण है और यह उसकी भूमि का अभिन्न हिस्सा है । तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा और तिब्बती शरणार्थी चीन पर इस क्षेत्र में व्यापक मानवाधिकार हनन का आरोप लगाते हैं ।
शनिवार, 8 मार्च 2008
मुशर्रफ ने पाकिस्तान में नए गठबंधन को समर्थन देने का वायदा किया
मुशर्रफ ने पाकिस्तान में नए गठबंधन को समर्थन देने का वायदा किया
पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने शुक्रवार को वायदा किया कि जब तक शांति बनी रहेगी, वह नई गठबंधन सरकार को पूरा समर्थन देंगे ।
श्री मुशर्रफ अगले दो हफ्तों के भीतर नई संसद का गठन कर सकते हैं ।
पिछले महीने हुए संसदीय चुनावों में मध्यमार्गी और धर्मनिरपेक्ष पाकिस्तानी विपक्षी पार्टियों ने ज्यादातर सीटें जीत ली थीं और मुशर्रफ-समर्थक सत्तारूढ़ पार्टी तथा इस्लामी पार्टियों को हरा दिया था । चुनाव में विजयी हुए कुछ लोगों ने श्री मुशर्रफ से इस्तीफा देने के लिए कहा है ।
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष ने कहा कि सशस्त्र फौजें भी नव-निर्वाचित सांसदों को समर्थन देंगी ।
जनरल अश्फाक परवेज़ कयानी ने कहा कि सेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करती है और निर्वाचित नेताओं को समर्थन देने की अपनी संवैधानिक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है ।
पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ कमांडरों के साथ हुई बैठक में जनरल कयानी ने सेना और राष्ट्रपति मुशर्रफ के बीच दरार पड़ने के संकेतों को खारिज करते हुए कहा कि यह देश के हित में नहीं होगा ।
जनरल कयानी को पिछले वर्ष श्री मुशर्रफ ने दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद और खुद सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने पर सेनाध्यक्ष नियुक्त किया था ।
जनरल कयानी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रहेगी और उन्हें आशा है कि सशस्त्र फौजों को अनावश्यक विवाद में नहीं घसीटा जाएगा ।
उधर पाकिस्तान पीपल्स पार्टी, जिसने चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं, ने फिलहाल यह फैसला टाल दिया है कि देश का अगला प्रधानमंत्री किसे बनाया जाएगा ।
पीपीपी के कई वरिष्ठ सदस्य इस पद को हासिल करने की दौड़ में हैं, जिनमें श्री मखदूम अमीन फहीम भी हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय बेनज़ीर भुट्टो के लंबे समय तक सहयोगी रहे थे ।
स्वर्गीय भुट्टो के पति आसिफ अली ज़रदारी ने खुद को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं किया है । पीपीपी के सह-अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की पार्टी और अन्य छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन सरकार बनाने के बारे में बातचीत कर रहे हैं ।
पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने शुक्रवार को वायदा किया कि जब तक शांति बनी रहेगी, वह नई गठबंधन सरकार को पूरा समर्थन देंगे ।
श्री मुशर्रफ अगले दो हफ्तों के भीतर नई संसद का गठन कर सकते हैं ।
पिछले महीने हुए संसदीय चुनावों में मध्यमार्गी और धर्मनिरपेक्ष पाकिस्तानी विपक्षी पार्टियों ने ज्यादातर सीटें जीत ली थीं और मुशर्रफ-समर्थक सत्तारूढ़ पार्टी तथा इस्लामी पार्टियों को हरा दिया था । चुनाव में विजयी हुए कुछ लोगों ने श्री मुशर्रफ से इस्तीफा देने के लिए कहा है ।
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष ने कहा कि सशस्त्र फौजें भी नव-निर्वाचित सांसदों को समर्थन देंगी ।
जनरल अश्फाक परवेज़ कयानी ने कहा कि सेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करती है और निर्वाचित नेताओं को समर्थन देने की अपनी संवैधानिक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है ।
पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ कमांडरों के साथ हुई बैठक में जनरल कयानी ने सेना और राष्ट्रपति मुशर्रफ के बीच दरार पड़ने के संकेतों को खारिज करते हुए कहा कि यह देश के हित में नहीं होगा ।
जनरल कयानी को पिछले वर्ष श्री मुशर्रफ ने दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद और खुद सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने पर सेनाध्यक्ष नियुक्त किया था ।
जनरल कयानी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रहेगी और उन्हें आशा है कि सशस्त्र फौजों को अनावश्यक विवाद में नहीं घसीटा जाएगा ।
उधर पाकिस्तान पीपल्स पार्टी, जिसने चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं, ने फिलहाल यह फैसला टाल दिया है कि देश का अगला प्रधानमंत्री किसे बनाया जाएगा ।
पीपीपी के कई वरिष्ठ सदस्य इस पद को हासिल करने की दौड़ में हैं, जिनमें श्री मखदूम अमीन फहीम भी हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय बेनज़ीर भुट्टो के लंबे समय तक सहयोगी रहे थे ।
स्वर्गीय भुट्टो के पति आसिफ अली ज़रदारी ने खुद को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं किया है । पीपीपी के सह-अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की पार्टी और अन्य छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन सरकार बनाने के बारे में बातचीत कर रहे हैं ।
भारत में आध्यात्मिक महिला नेताओं की बैठक
भारत में आध्यात्मिक महिला नेताओं की बैठक
45 देशों से कई सौ महिला नेता भारत में एकत्र हुई हैं और यह चर्चा करेंगी कि महिलाएं विश्व में हिंसक संघर्ष को हल करने में कैसे मदद कर सकती हैं । यह सम्मेलन न्यूयॉर्क स्थित संगठन, ग्लोबल पीस इनिशियेटिव फॉर विमेन ने आयोजित किया है ।
भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर में करीब 400 महिलाओं की बैठक का उद्देश्य ऐसे तरीके तलाश करना है, जिससे महिलाओं की आवाजों और विचारों को ज्यादा जोर से सुना जा सके ताकि विश्व युद्ध से दूर हट सके । ज्यादातर प्रतिनिधि विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाली धार्मिक नेता हैं । वह पूरे विश्व से आई हैं- अफ्रीका, मध्य-पूर्व, अफगानिस्तान और अमेरिका से ।
यह पांच-दिवसीय सम्मेलन सोमवार को सम्पन्न होगा ।
सम्मेलन में भाग ले रही महिलाओं ने कहा है कि महिलाओं का संकट हल करने के मुद्दे के बारे में एक बिलकुल अलग दृष्टिकोण होता है और उनसे ज्यादा सलाह-मशविरा किये जाने की जरूरत है ।
न्यूयॉर्क स्थित ग्लोबल पीस इनिशियेटिव फॉर विमेन की सदस्य डेना मरियम का कहना है कि वे चाहती हैं कि मतभेदों को दूर करने के लिए अहिंसक विकल्पों को खोजा जाए ।
सुश्री मरियम ने कहा, "स्थानीय अमेरिकी कबीलों की एक परंपरा थी । जब कोई कबीला युद्ध में जाता था तो उससे पहले उन्हें बुजुर्ग महिलाओं से आशीर्वाद लेना होता था । इसलिए कि महिलाएं अपने बेटों को युद्ध में भेज रही होती थीं और वे यह सुनिश्चित करना चाहती थीं कि ऐसा करना जरूरी है । यह कोई छोटी बात नहीं थी । मेरा मानना है कि अगर महिलाओं से सलाह ली जाए कि क्या तुम अपने बेटों को युद्ध में भेजना चाहती हो तो हम इसके बारे में बहुत अधिक और गहरा विचार करेंगी ।"
अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि महिलाओं में दया, सहनशीलता और सहानुभूति के गुण होते हैं, जिससे वे पुरुषों की अपेक्षा, जो सत्ता और आक्रमण से ज्यादा जुड़े होते हैं, हिंसा के विकल्प ज्यादा आसानी से खोज सकती हैं ।
पश्चिमी तट के रामल्लाह शहर की मनोवैज्ञानिक लैला एत्सान का कहना है कि अगर महिलाएं अग्रिम मोर्चे पर होतीं तो इस्राइली-फिलिस्तीनी संघर्ष से अगल तरीके से निपटा जा सकता था ।
उन्होंने कहा कि सभी मामलों में, हर संबंध में उनका पुरुषों पर अधिकार होता है, लेकिन अब दुर्भाग्य से अग्रिम सत्ता पुरुषों के हाथ में है, जिससे विश्व की नियति का फैसला होता है । इसलिए इसे कुछ उलटने की जरूरत है । अगर फिलिस्तीन में महिलाएं ज्यादा बड़ी भूमिकाएं लेतीं और कारगर ढंग से निभातीं तो हमास जैसी समस्याएं नहीं होतीं, हम इस्राइली सैनिकों के सामने अहिंसक प्रदर्शन करते और हथियारों से प्रतिक्रिया करने के बजाय इससे परिवर्तन करते ।
यहां एकत्र महिलाओं ने कहा कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है, हालांकि वे विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व करती हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य एक ही है- यह सुनिश्चित करना कि उनके बच्चों के लिए विश्व ज्यादा सुरक्षित हो ।
वे मानती हैं कि ऐसा कहना आसान है, लेकिन काम बहुत मुश्किल है । उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन इसकी शुरुआत है ।
45 देशों से कई सौ महिला नेता भारत में एकत्र हुई हैं और यह चर्चा करेंगी कि महिलाएं विश्व में हिंसक संघर्ष को हल करने में कैसे मदद कर सकती हैं । यह सम्मेलन न्यूयॉर्क स्थित संगठन, ग्लोबल पीस इनिशियेटिव फॉर विमेन ने आयोजित किया है ।
भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर में करीब 400 महिलाओं की बैठक का उद्देश्य ऐसे तरीके तलाश करना है, जिससे महिलाओं की आवाजों और विचारों को ज्यादा जोर से सुना जा सके ताकि विश्व युद्ध से दूर हट सके । ज्यादातर प्रतिनिधि विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाली धार्मिक नेता हैं । वह पूरे विश्व से आई हैं- अफ्रीका, मध्य-पूर्व, अफगानिस्तान और अमेरिका से ।
यह पांच-दिवसीय सम्मेलन सोमवार को सम्पन्न होगा ।
सम्मेलन में भाग ले रही महिलाओं ने कहा है कि महिलाओं का संकट हल करने के मुद्दे के बारे में एक बिलकुल अलग दृष्टिकोण होता है और उनसे ज्यादा सलाह-मशविरा किये जाने की जरूरत है ।
न्यूयॉर्क स्थित ग्लोबल पीस इनिशियेटिव फॉर विमेन की सदस्य डेना मरियम का कहना है कि वे चाहती हैं कि मतभेदों को दूर करने के लिए अहिंसक विकल्पों को खोजा जाए ।
सुश्री मरियम ने कहा, "स्थानीय अमेरिकी कबीलों की एक परंपरा थी । जब कोई कबीला युद्ध में जाता था तो उससे पहले उन्हें बुजुर्ग महिलाओं से आशीर्वाद लेना होता था । इसलिए कि महिलाएं अपने बेटों को युद्ध में भेज रही होती थीं और वे यह सुनिश्चित करना चाहती थीं कि ऐसा करना जरूरी है । यह कोई छोटी बात नहीं थी । मेरा मानना है कि अगर महिलाओं से सलाह ली जाए कि क्या तुम अपने बेटों को युद्ध में भेजना चाहती हो तो हम इसके बारे में बहुत अधिक और गहरा विचार करेंगी ।"
अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि महिलाओं में दया, सहनशीलता और सहानुभूति के गुण होते हैं, जिससे वे पुरुषों की अपेक्षा, जो सत्ता और आक्रमण से ज्यादा जुड़े होते हैं, हिंसा के विकल्प ज्यादा आसानी से खोज सकती हैं ।
पश्चिमी तट के रामल्लाह शहर की मनोवैज्ञानिक लैला एत्सान का कहना है कि अगर महिलाएं अग्रिम मोर्चे पर होतीं तो इस्राइली-फिलिस्तीनी संघर्ष से अगल तरीके से निपटा जा सकता था ।
उन्होंने कहा कि सभी मामलों में, हर संबंध में उनका पुरुषों पर अधिकार होता है, लेकिन अब दुर्भाग्य से अग्रिम सत्ता पुरुषों के हाथ में है, जिससे विश्व की नियति का फैसला होता है । इसलिए इसे कुछ उलटने की जरूरत है । अगर फिलिस्तीन में महिलाएं ज्यादा बड़ी भूमिकाएं लेतीं और कारगर ढंग से निभातीं तो हमास जैसी समस्याएं नहीं होतीं, हम इस्राइली सैनिकों के सामने अहिंसक प्रदर्शन करते और हथियारों से प्रतिक्रिया करने के बजाय इससे परिवर्तन करते ।
यहां एकत्र महिलाओं ने कहा कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है, हालांकि वे विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व करती हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य एक ही है- यह सुनिश्चित करना कि उनके बच्चों के लिए विश्व ज्यादा सुरक्षित हो ।
वे मानती हैं कि ऐसा कहना आसान है, लेकिन काम बहुत मुश्किल है । उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन इसकी शुरुआत है ।
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